परमहंस ने अपने सुयोग्य शिष्य नरेन्द्र से पहले ही कह दिया था:
‘‘तुम इन लोगों को देखकर अपने मन मंे हीनता के भाव मत लाओ। इन लोगों का जीवन सौ-सौ वर्ष से अधिक नहीं, जबकि तुम हज़ार वर्ष का जीवन लेकर आए हो।’’ रामकृष्ण ने विवेकानन्द के चरित्र की दृढ़ता उसी समय देख ली थी। रामनाड, मैसूर और खेतड़ी के जिन राजाओं ने विवेकानन्द को शिकागो भेजने में सहायता दी थी और जो लौटने पर स्वागत-समारोह में बड़े उत्साह से उनकी गाड़ी में जुते थे, वे
परमहंस ने अपने सुयोग्य शिष्य नरेन्द्र से पहले ही कह दिया था:
‘‘तुम इन लोगों को देखकर अपने मन मंे हीनता के भाव मत लाओ। इन लोगों का जीवन सौ-सौ वर्ष से अधिक नहीं, जबकि तुम हज़ार वर्ष का जीवन लेकर आए हो।’’ रामकृष्ण ने विवेकानन्द के चरित्र की दृढ़ता उसी समय देख ली थी। रामनाड, मैसूर और खेतड़ी के जिन राजाओं ने विवेकानन्द को शिकागो भेजने में सहायता दी थी और जो लौटने पर स्वागत-समारोह में बड़े उत्साह से उनकी गाड़ी में जुते थे, वे