भी सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी होने के नाते देश के अतीत में गौरव अनुभव करते थे। उनके चरित्र में भी तथाकथित सुधारकांे की अपेक्षा अधिक दृढ़ता थी। मुख्य प्रश्न सुधार का नहीं, देश को विदेशी दासता से मुक्त करने का था। मज़दूर, किसान तथा विद्यार्थी शोषण और दमन के विरूद्व उठ रहे थे। उभरते हए राष्ट्रीय पूंजीपति वर्ग और साम्राज्यवाद में वर्ग संघर्ष तेज़तर होता जा रहा था। आनन्द मोहन वसु ने कैम्ब्रिज से लौटकर विद्यार्थी आन्दोलन संगठित किया
भी सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी होने के नाते देश के अतीत में गौरव अनुभव करते थे। उनके चरित्र में भी तथाकथित सुधारकांे की अपेक्षा अधिक दृढ़ता थी। मुख्य प्रश्न सुधार का नहीं, देश को विदेशी दासता से मुक्त करने का था। मज़दूर, किसान तथा विद्यार्थी शोषण और दमन के विरूद्व उठ रहे थे। उभरते हए राष्ट्रीय पूंजीपति वर्ग और साम्राज्यवाद में वर्ग संघर्ष तेज़तर होता जा रहा था। आनन्द मोहन वसु ने कैम्ब्रिज से लौटकर विद्यार्थी आन्दोलन संगठित किया