197 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पाठकों को भी सुझाया कि दासता की परिस्थिति में उनके पुरखों को विदेशी सत्ता के विरूद्व कैसे लोहे से लोहा लड़ाना पड़ा था। बंकिमचन्द्र ने 1873-74 में ‘बंग दर्शन’ नाम की साहित्यिक पत्रिका भी जारी की थी। बिपिनचन्द्र पाल के अनुसार:‘‘इस पत्रिका ने वही भूमिका अदा की जो फ्रांस के विश्वकोशियों ने यूरोपीय विचार और फ्रांसिसी साहित्य में अदा की थी।’’ हेमचन्द्र और मधुसूदन दत्त नई चेतना के सशक्त कवि थे।
197 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पाठकों को भी सुझाया कि दासता की परिस्थिति में उनके पुरखों को विदेशी सत्ता के विरूद्व कैसे लोहे से लोहा लड़ाना पड़ा था। बंकिमचन्द्र ने 1873-74 में ‘बंग दर्शन’ नाम की साहित्यिक पत्रिका भी जारी की थी। बिपिनचन्द्र पाल के अनुसार:‘‘इस पत्रिका ने वही भूमिका अदा की जो फ्रांस के विश्वकोशियों ने यूरोपीय विचार और फ्रांसिसी साहित्य में अदा की थी।’’ हेमचन्द्र और मधुसूदन दत्त नई चेतना के सशक्त कवि थे।