दीनबंधु मित्र ने अपने ‘नील दर्पण’ नाटक में गोरे ज़मींदारों के द्वारा चम्पारन के किसानों पर ढाए जा रहे अत्याचारों तथा अंधी लूट-खसोट का यथार्थ चित्रण किया था। ब्रिटिश सरकार ने इस नाटक को अवैध घोषित किया और इसका अंगे्रज़ी अनुवाद करने वाले राइट नामी मिशनरी को भारत से निकाल दिया।
यह साहित्यिक चेतना बंगाल तक ही सीमित नहीं थी, उसका प्रभाव देशव्यापी था। उत्तरी भारत में भारतेन्दु हरिशचन्द्र, मुहम्मद हसन आज़ाद, अल्ताफ हुसैन हाली
दीनबंधु मित्र ने अपने ‘नील दर्पण’ नाटक में गोरे ज़मींदारों के द्वारा चम्पारन के किसानों पर ढाए जा रहे अत्याचारों तथा अंधी लूट-खसोट का यथार्थ चित्रण किया था। ब्रिटिश सरकार ने इस नाटक को अवैध घोषित किया और इसका अंगे्रज़ी अनुवाद करने वाले राइट नामी मिशनरी को भारत से निकाल दिया।
यह साहित्यिक चेतना बंगाल तक ही सीमित नहीं थी, उसका प्रभाव देशव्यापी था। उत्तरी भारत में भारतेन्दु हरिशचन्द्र, मुहम्मद हसन आज़ाद, अल्ताफ हुसैन हाली