योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

और भाई पूर्णसिंह उसके प्रतिनिधि थे। बौद्विक जीवन में ज़बरदस्त हलचल पैदा हुई थी। बिपिनचन्द्र पाल ‘मेरे जीवन और समय के संस्मरण’ नाम की अपनी पुस्तक में लिखते हैं:

‘‘अंग्रेज़ी पढ़े-लिखे बंगालियों की नई पीढ़ी नये प्रशासन में ज़िम्मेदारी के पदों पर आने लगी थी। कानून और डाक्टरी के पेशों में भी वे गोरों के साथ होड़ ले रहे थे। इन अंगे्रज़ी पढ़े-लिखे बंगालियों की बातचीत और चरित्र में स्वच्छन्दता तथा आत्मविश्वास की नई चेतना व्यक्त होती


995 of 1197

और भाई पूर्णसिंह उसके प्रतिनिधि थे। बौद्विक जीवन में ज़बरदस्त हलचल पैदा हुई थी। बिपिनचन्द्र पाल ‘मेरे जीवन और समय के संस्मरण’ नाम की अपनी पुस्तक में लिखते हैं:

‘‘अंग्रेज़ी पढ़े-लिखे बंगालियों की नई पीढ़ी नये प्रशासन में ज़िम्मेदारी के पदों पर आने लगी थी। कानून और डाक्टरी के पेशों में भी वे गोरों के साथ होड़ ले रहे थे। इन अंगे्रज़ी पढ़े-लिखे बंगालियों की बातचीत और चरित्र में स्वच्छन्दता तथा आत्मविश्वास की नई चेतना व्यक्त होती


995 of 1197