हो पाया कि केशवचन्द्र और उनके अनुुयायियों ने न संस्कृत पढ़ी थी और न प्राचीन शास्त्रों में उनकी आस्था थी। स्वयं दयानन्द संस्कृत के विद्वान थे और वे वेदों को अपोरूणीय तथा समस्त विद्याओं का óोत मानते थे। इसके अतिरिक्त दयानन्द आधुनिक न होकर पुनरूत्ािानवादी थे और अतीत की ओर लौट जाने की बात कहते थे। इसके बावजूद आर्यसमाज ने उत्तर भारत में राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। हर देश का उभरता हुआ पूंजीपति वर्ग
हो पाया कि केशवचन्द्र और उनके अनुुयायियों ने न संस्कृत पढ़ी थी और न प्राचीन शास्त्रों में उनकी आस्था थी। स्वयं दयानन्द संस्कृत के विद्वान थे और वे वेदों को अपोरूणीय तथा समस्त विद्याओं का óोत मानते थे। इसके अतिरिक्त दयानन्द आधुनिक न होकर पुनरूत्ािानवादी थे और अतीत की ओर लौट जाने की बात कहते थे। इसके बावजूद आर्यसमाज ने उत्तर भारत में राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। हर देश का उभरता हुआ पूंजीपति वर्ग