गबन - Gaban



जालपा-'वह तो तब मालूम होता, जब मैं तुम्हारे ह्रदय में पैठकर देखती।'

रमानाथ-'वहां तुम अपनी ही प्रतिमा देखतीं।'

रात को जालपा ने एक भयंकर स्वप्न देखा, वह चिल्ला पड़ी। रमा ने चौंककर पूछा,'क्या है? जालपा, क्या स्वप्न देख रही हो? '

जालपा ने इधर-उधर घबडाई हुई आंखों से देखकर कहा,'बडे संकट में जान पड़ी थी। न जाने कैसा सपना देख रही थी! '

रमानाथ-'क्या देखा?'

जालपा-'क्या बताऊं, कुछ कहा नहीं जाता। देखती थी कि तुम्हें कई


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जालपा-'वह तो तब मालूम होता, जब मैं तुम्हारे ह्रदय में पैठकर देखती।'

रमानाथ-'वहां तुम अपनी ही प्रतिमा देखतीं।'

रात को जालपा ने एक भयंकर स्वप्न देखा, वह चिल्ला पड़ी। रमा ने चौंककर पूछा,'क्या है? जालपा, क्या स्वप्न देख रही हो? '

जालपा ने इधर-उधर घबडाई हुई आंखों से देखकर कहा,'बडे संकट में जान पड़ी थी। न जाने कैसा सपना देख रही थी! '

रमानाथ-'क्या देखा?'

जालपा-'क्या बताऊं, कुछ कहा नहीं जाता। देखती थी कि तुम्हें कई


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