डोरियन ने प्याला खाली करके कहा-'देश का इतना सम्मान क्यों ? देश है क्या ? एक बहती हुई नदी। किनारे बदलते रहते हैं और जल में नित नयी तरंगें उठती रहती हैं।
जलसेनानायक ने उत्तर दिया-'डोरियन, मुझे मालूम है कि तुम नागरिक विषयों की परवाह नहीं करते और तुम्हारा विचार है कि ज्ञानियों को इन वस्तुओं से अलगअलग रहना चाहिए। इसके परतिकूल मेरा विचार है कि एक सत्यवादी पुरुष के लिए सबसे महान इच्छा यही होनी चाहिए कि वह सामराज्य में किसी
डोरियन ने प्याला खाली करके कहा-'देश का इतना सम्मान क्यों ? देश है क्या ? एक बहती हुई नदी। किनारे बदलते रहते हैं और जल में नित नयी तरंगें उठती रहती हैं।
जलसेनानायक ने उत्तर दिया-'डोरियन, मुझे मालूम है कि तुम नागरिक विषयों की परवाह नहीं करते और तुम्हारा विचार है कि ज्ञानियों को इन वस्तुओं से अलगअलग रहना चाहिए। इसके परतिकूल मेरा विचार है कि एक सत्यवादी पुरुष के लिए सबसे महान इच्छा यही होनी चाहिए कि वह सामराज्य में किसी