मैं यहूदी धर्मगरन्थों को इनके समान सम्मान के योग्य नहीं समझता। उनकी रचना ईश्वरीय ज्ञान द्वारा नहीं हुई है, वरन एक पिशाच द्वारा जो ईश्वर का महान शत्रु था। इसी पिशाच ने, जिसका नाम आइवे था उन गरन्थों को लिखवाया। वह उन दुष्टात्माओं में से था जो नरकलोक में बसते हैं और उन समस्त विडम्बनाओं के कारण हैं जिनसे मनुष्य मात्र पीड़ित हैं। लेकिन आइवे अज्ञान, कुटिलता और त्र्कूरता में उन सबों से ब़कर था। इसके विरुद्ध, सोने के परों कासा सर्प जो ज्ञानवृद्ध से लिपटा हुआ था,
मैं यहूदी धर्मगरन्थों को इनके समान सम्मान के योग्य नहीं समझता। उनकी रचना ईश्वरीय ज्ञान द्वारा नहीं हुई है, वरन एक पिशाच द्वारा जो ईश्वर का महान शत्रु था। इसी पिशाच ने, जिसका नाम आइवे था उन गरन्थों को लिखवाया। वह उन दुष्टात्माओं में से था जो नरकलोक में बसते हैं और उन समस्त विडम्बनाओं के कारण हैं जिनसे मनुष्य मात्र पीड़ित हैं। लेकिन आइवे अज्ञान, कुटिलता और त्र्कूरता में उन सबों से ब़कर था। इसके विरुद्ध, सोने के परों कासा सर्प जो ज्ञानवृद्ध से लिपटा हुआ था,