अलंकार - Alankar

कि शरीर के रहते हुए मनुष्य मुक्त हो जाये?'

'पिरय पुत्र, तुम्हें यह शीघर ही ज्ञात हो जायेगा। एक क्षण में तुम कहोगे यूत्र्काइटीज मुक्त हो गया।'

वृद्ध पुरुष एक संगमरमर के स्तम्भ से पीठ लगाये यह बातें कर रहा था और सूयोर्दय की परथम ज्योतिरेखाएं उसके मुख को आलोकित कर रही थीं। हरमोडोरस और मार्कस भी उसके समीप आकर निसियास की बगल में खड़े थे और चारों पराणी, मदिरासेवियों के हंसीठट्ठे की परवाह न करके ज्ञानचचार में मग्न हो रहे


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कि शरीर के रहते हुए मनुष्य मुक्त हो जाये?'

'पिरय पुत्र, तुम्हें यह शीघर ही ज्ञात हो जायेगा। एक क्षण में तुम कहोगे यूत्र्काइटीज मुक्त हो गया।'

वृद्ध पुरुष एक संगमरमर के स्तम्भ से पीठ लगाये यह बातें कर रहा था और सूयोर्दय की परथम ज्योतिरेखाएं उसके मुख को आलोकित कर रही थीं। हरमोडोरस और मार्कस भी उसके समीप आकर निसियास की बगल में खड़े थे और चारों पराणी, मदिरासेवियों के हंसीठट्ठे की परवाह न करके ज्ञानचचार में मग्न हो रहे


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