से कांप रहे थे। उनके सामने एक मैदान था। इस समय सन्नाटा छाया हुआ था। मैदान के चारों तरफ योद्घाओं की मूर्तियां बनी हुई थीं और चारों सिरों पर अर्धचन्द्राकार संगमरमर की चौकियां बनी हुई थीं, जो दैत्यों की मूर्तियों पर स्थित थीं। थायस एक चौकी पर गिर पड़ी। एक क्षण विश्राम लेने के बाद उसने सचिन्त नेत्रों से पापनाशी की ओर देखा पूछा-'अब मैं कहां जाऊ ?'
पापनाशी ने उत्तर दिया-'तुझे उसके साथ जाना चाहिए जो तेरी खोज में कितनी ही मंजिलें
से कांप रहे थे। उनके सामने एक मैदान था। इस समय सन्नाटा छाया हुआ था। मैदान के चारों तरफ योद्घाओं की मूर्तियां बनी हुई थीं और चारों सिरों पर अर्धचन्द्राकार संगमरमर की चौकियां बनी हुई थीं, जो दैत्यों की मूर्तियों पर स्थित थीं। थायस एक चौकी पर गिर पड़ी। एक क्षण विश्राम लेने के बाद उसने सचिन्त नेत्रों से पापनाशी की ओर देखा पूछा-'अब मैं कहां जाऊ ?'
पापनाशी ने उत्तर दिया-'तुझे उसके साथ जाना चाहिए जो तेरी खोज में कितनी ही मंजिलें