अलंकार - Alankar

माली के हाथ से मूर्ति छीन ली, तुरन्त उसे चिता में डाल दिया और निर्दय स्वर में बोला-'जब यह निसियास की चीज है और उसने इसे स्पर्श किया है तो मुझसे इसकी सिफारिश करना व्यर्थ है। उस पापी का स्पर्शमात्र समस्त विकारों से परिपूरित कर देने के लिए काफी है।'

तब उसने चमकते हुए वस्त्र, भांतिभांति के आभूषण, सोने की पादुकाएं, रत्नजटित कंघियां, बहुमूल्य आईने, भांतिभांति के गानेबजाने की वस्तुएं सरोद, सितार, वीण, नाना परकार के फानूस,


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माली के हाथ से मूर्ति छीन ली, तुरन्त उसे चिता में डाल दिया और निर्दय स्वर में बोला-'जब यह निसियास की चीज है और उसने इसे स्पर्श किया है तो मुझसे इसकी सिफारिश करना व्यर्थ है। उस पापी का स्पर्शमात्र समस्त विकारों से परिपूरित कर देने के लिए काफी है।'

तब उसने चमकते हुए वस्त्र, भांतिभांति के आभूषण, सोने की पादुकाएं, रत्नजटित कंघियां, बहुमूल्य आईने, भांतिभांति के गानेबजाने की वस्तुएं सरोद, सितार, वीण, नाना परकार के फानूस,


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