में लग गया कि येन केन प्रकारेण मरहठों को अपने में मिलावें। कुछ दिनों बाद यादवराव, मलिक अम्बर से बिगड़कर मुगल सेना से मिल गये जिसके फलस्वरूप 15 सवार उनके अधिकार में दिये गये। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि मुगल सम्राट् के प्रतिनिधियों ने जो दक्षिण में लड़ रहे थे सम्राट् की आज्ञानुसार एक मरहठे सरदार की कितनी प्रतिष्ठा की। जो सम्बन्धी उनके साथ आये थे उनको भी बड़े बड़े पद और अधिकार दिये गये, परन्तु शाहजी भोंसले अपने श्वसुर के
में लग गया कि येन केन प्रकारेण मरहठों को अपने में मिलावें। कुछ दिनों बाद यादवराव, मलिक अम्बर से बिगड़कर मुगल सेना से मिल गये जिसके फलस्वरूप 15 सवार उनके अधिकार में दिये गये। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि मुगल सम्राट् के प्रतिनिधियों ने जो दक्षिण में लड़ रहे थे सम्राट् की आज्ञानुसार एक मरहठे सरदार की कितनी प्रतिष्ठा की। जो सम्बन्धी उनके साथ आये थे उनको भी बड़े बड़े पद और अधिकार दिये गये, परन्तु शाहजी भोंसले अपने श्वसुर के