पर बैठाया था उसे मुगल सेना ने पकड़ कर ग्वालियर के किले में कैद कर दिया। शाहजी भोंसले ने तुरन्त अहमदनगर के शाही खानदान के एक कम अवस्था वाले बालक को सिंहासन पर बिठा दिया और आप उसका प्रबन्धकर्ता बन बैठा। बीजापुर के राज्य में इस समय दो बलशाली सरदार थे जो मुरारपन्त और अब्दुल्ला खां के नामों से प्रसिद्व थे और गुप्त रूप से शाहजी भोंसले के सहायक थे। महाबतखां और उसका बेटा दोनों इस लड़ाई में पूर्ण रूप से हारे। जब शाहजहां ने यह
पर बैठाया था उसे मुगल सेना ने पकड़ कर ग्वालियर के किले में कैद कर दिया। शाहजी भोंसले ने तुरन्त अहमदनगर के शाही खानदान के एक कम अवस्था वाले बालक को सिंहासन पर बिठा दिया और आप उसका प्रबन्धकर्ता बन बैठा। बीजापुर के राज्य में इस समय दो बलशाली सरदार थे जो मुरारपन्त और अब्दुल्ला खां के नामों से प्रसिद्व थे और गुप्त रूप से शाहजी भोंसले के सहायक थे। महाबतखां और उसका बेटा दोनों इस लड़ाई में पूर्ण रूप से हारे। जब शाहजहां ने यह