दिन बाद फिर कर्नाटक की लड़ाई को रवाना हुए। शिवाजी माता के साथ पूना में विश्राम लेते रहे।
शिवाजी के बाल्यकाल की एक कहानी इस प्रकार प्रसिद्व है जिससे उनके आगामी पवित्र जीवन का वृत्तान्त
छत्रपति शिवाजी 39
भली प्रकार मालूम होता है। कहते हैं कि जब शाहजी भोंसले बीजापुर दरबार में थे तब एक दिन ’मुरार पन्त’ ने शिवाजी से कहा ’’ चलो आज तुमको दरबार में ले चलें और बादशाह को सलाम करायें।’’ होनहार बालक ने इसमें प्रसन्नता के बदले
दिन बाद फिर कर्नाटक की लड़ाई को रवाना हुए। शिवाजी माता के साथ पूना में विश्राम लेते रहे।
शिवाजी के बाल्यकाल की एक कहानी इस प्रकार प्रसिद्व है जिससे उनके आगामी पवित्र जीवन का वृत्तान्त
छत्रपति शिवाजी 39
भली प्रकार मालूम होता है। कहते हैं कि जब शाहजी भोंसले बीजापुर दरबार में थे तब एक दिन ’मुरार पन्त’ ने शिवाजी से कहा ’’ चलो आज तुमको दरबार में ले चलें और बादशाह को सलाम करायें।’’ होनहार बालक ने इसमें प्रसन्नता के बदले