घृणा प्रकट की और कहा कि हम हिन्दू हैं और बादशाह यवन है, महायवन है, महानीच है। हम गौ और ब्रह्यण के सेवक हैं और वह उनका शत्रु है। हमार और उसका मेल नहीं हो सकता। मैं ऐसे मनुष्य से सलाम करना नहीं चाहता जो हमारे धर्म का शत्रु है। उसे तो मैं छूना भी नहीं चाहता। मैं ऐसे मनुष्य को कभी बादशाह नहीं मान सकता और न कभी उसका अदब कर सकता हूं। सलाम तो एक तरफ रहा, मेरे मन में यह बात आती है कि उसका गला काट डालूं।
जिस समय मुरार पन्त ने
घृणा प्रकट की और कहा कि हम हिन्दू हैं और बादशाह यवन है, महायवन है, महानीच है। हम गौ और ब्रह्यण के सेवक हैं और वह उनका शत्रु है। हमार और उसका मेल नहीं हो सकता। मैं ऐसे मनुष्य से सलाम करना नहीं चाहता जो हमारे धर्म का शत्रु है। उसे तो मैं छूना भी नहीं चाहता। मैं ऐसे मनुष्य को कभी बादशाह नहीं मान सकता और न कभी उसका अदब कर सकता हूं। सलाम तो एक तरफ रहा, मेरे मन में यह बात आती है कि उसका गला काट डालूं।
जिस समय मुरार पन्त ने