बच्चे शिवाजी की यह भोली बात सुनी तो आश्चर्य करने लगा और उसके माता पिता को समस्त समाचार सुनाया। माता पिता दोनों ने बच्चे को समझाया कि यह समय ऐसी बातें करने का नहीं है। इस समय मुसलमानों का आधिपत्य है। उनके बादशाह को सलाम करना हमारा फर्ज है। इस प्रकार समझा बुझा कर शिवाजी को दरबाार में ले गये परन्तु वहां जाकर शिवाजी ने बादशाह को सलाम नहीं किया। शाहजी और मुरारपन्त ने यह कह कर बात टाल दी कि अभी ’बच्चा’ है दरबार का नियम नहीं
बच्चे शिवाजी की यह भोली बात सुनी तो आश्चर्य करने लगा और उसके माता पिता को समस्त समाचार सुनाया। माता पिता दोनों ने बच्चे को समझाया कि यह समय ऐसी बातें करने का नहीं है। इस समय मुसलमानों का आधिपत्य है। उनके बादशाह को सलाम करना हमारा फर्ज है। इस प्रकार समझा बुझा कर शिवाजी को दरबाार में ले गये परन्तु वहां जाकर शिवाजी ने बादशाह को सलाम नहीं किया। शाहजी और मुरारपन्त ने यह कह कर बात टाल दी कि अभी ’बच्चा’ है दरबार का नियम नहीं