जानता। शिवाजी जब दरबार से घर वापस आया तो उसने स्नान किया और नवीन वस्त्र बदले।
शाहजी को अपने नौकरों में सिर्फ दो नौकरों पर पूरा विश्वास था। उनमें से एक का नाम दादा जी कोंड़देव था। दादाजी कोंडदेव के अधीन पूना का प्रबन्ध था जहां पर शिवाजी तथा उनकी माता रहा करती थी। दादाजी कोंड़देव एक बड़ा बुद्विमान और चतुर आदमी था। इसी ने शिवाजी को उत्तमोत्तम शिक्षा दी थी। जो उसका कत्र्तव्य था उस सब को उसने बड़ी बुद्विमानी से पूर्ण किया। जागीर का प्रबन्ध इस
जानता। शिवाजी जब दरबार से घर वापस आया तो उसने स्नान किया और नवीन वस्त्र बदले।
शाहजी को अपने नौकरों में सिर्फ दो नौकरों पर पूरा विश्वास था। उनमें से एक का नाम दादा जी कोंड़देव था। दादाजी कोंडदेव के अधीन पूना का प्रबन्ध था जहां पर शिवाजी तथा उनकी माता रहा करती थी। दादाजी कोंड़देव एक बड़ा बुद्विमान और चतुर आदमी था। इसी ने शिवाजी को उत्तमोत्तम शिक्षा दी थी। जो उसका कत्र्तव्य था उस सब को उसने बड़ी बुद्विमानी से पूर्ण किया। जागीर का प्रबन्ध इस