40 छत्रपति शिवाजी
उत्तमता से किया कि खेती में खूब उन्नति होने लगी और इलाके की समस्त पहाड़ी आबादी को, जिसको मावली के नाम से पुकारा जाता था अपना सेवक बना लिया। प्रजा बहादुर और योद्वा किन्तु निर्धन थी। उसने कई वर्ष तक इन लोगों से मालगुजारी नहीं ली। प्रजा के बहुत से आदमियों को अपने यहां नौकर रखा और उनके पालन पोषण का प्रबन्ध किया। दादाजी कोंड़देव की यह दूरदर्शिता शिवाजी के काम आई। जहां उसने जागीर का प्रबन्ध उत्तम किया था
40 छत्रपति शिवाजी
उत्तमता से किया कि खेती में खूब उन्नति होने लगी और इलाके की समस्त पहाड़ी आबादी को, जिसको मावली के नाम से पुकारा जाता था अपना सेवक बना लिया। प्रजा बहादुर और योद्वा किन्तु निर्धन थी। उसने कई वर्ष तक इन लोगों से मालगुजारी नहीं ली। प्रजा के बहुत से आदमियों को अपने यहां नौकर रखा और उनके पालन पोषण का प्रबन्ध किया। दादाजी कोंड़देव की यह दूरदर्शिता शिवाजी के काम आई। जहां उसने जागीर का प्रबन्ध उत्तम किया था