छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

वहां शिवाजी की शिक्षा की भी पूरा ध्यान रखा था। इस समय मरहठों में पढ़ने लिखने की इतनी चर्चा नहीं थी बल्कि युद्व-विद्या को ही प्रधान कत्र्तव्य समझाा जाता था। शिवाजी बाल्यकाल में घोड़े की सवारी में अद्वितीय तथा शस्त्रविद्या में अनुपम हो गये थे। लक्ष्य लगाने, भाला चलाने और तलवारों के प्रयोग करने में भी सब जगह प्रसिद्व हो गये थे। उन समस्त गुप्त रीतियों और हथकण्डों को भी दादा जी कोंड़देव की कृपा से जान लिया जो उन जैसे वीरों के


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वहां शिवाजी की शिक्षा की भी पूरा ध्यान रखा था। इस समय मरहठों में पढ़ने लिखने की इतनी चर्चा नहीं थी बल्कि युद्व-विद्या को ही प्रधान कत्र्तव्य समझाा जाता था। शिवाजी बाल्यकाल में घोड़े की सवारी में अद्वितीय तथा शस्त्रविद्या में अनुपम हो गये थे। लक्ष्य लगाने, भाला चलाने और तलवारों के प्रयोग करने में भी सब जगह प्रसिद्व हो गये थे। उन समस्त गुप्त रीतियों और हथकण्डों को भी दादा जी कोंड़देव की कृपा से जान लिया जो उन जैसे वीरों के


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