लिए आवश्यक था। रामायण और महाभारत की कथा में उनको बड़ी भक्ति थी। यह भक्ति और प्रेम यहां तक बढ़ गये थे कि बड़ी अवस्था होने पर अपने प्राणों को संकट में डाल कर भी जहां कथा होती थी वहां पहुंच जाते थे। थोड़ी ही अवस्था में मुसलमानों के अत्याचार को देखकर उनसे उन्हें इतनी घृणा हो गई थी जो समस्त जीवन उनके हृदय में बनी रही। शिवाजी को अपनी युवावस्था में मावलियों से मिलने का अवसर बहुत मिला। उनसे मिलकर उनके गुणों को अच्छी प्रकार पहिचान
लिए आवश्यक था। रामायण और महाभारत की कथा में उनको बड़ी भक्ति थी। यह भक्ति और प्रेम यहां तक बढ़ गये थे कि बड़ी अवस्था होने पर अपने प्राणों को संकट में डाल कर भी जहां कथा होती थी वहां पहुंच जाते थे। थोड़ी ही अवस्था में मुसलमानों के अत्याचार को देखकर उनसे उन्हें इतनी घृणा हो गई थी जो समस्त जीवन उनके हृदय में बनी रही। शिवाजी को अपनी युवावस्था में मावलियों से मिलने का अवसर बहुत मिला। उनसे मिलकर उनके गुणों को अच्छी प्रकार पहिचान