छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

का होना अत्यन्त आवश्यक था। शिवाजी के मस्तिष्क में यह विचार रह रह कर जोश मारने लगा कि किसी तरह कोई किला हाथ आवे। हम पहले लिख चुके हैं कि मावली लोगों के चित्त को तो शिवाजी पहले ही वशीभूत कर चुके थे और देश के दुर्गम मार्ग शिकार खेलने के समय ही देख चुके थे। अतएव किसी किले को प्राप्त करना शिवाजी के लिए कोई कठिन काम न था। वह अपने मन की तरंग में सब कुछ कर सकते थे।

पूना में पश्चिमी भाग में करीब 20 मील की दूरी पर ’तोरण’ नामक


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का होना अत्यन्त आवश्यक था। शिवाजी के मस्तिष्क में यह विचार रह रह कर जोश मारने लगा कि किसी तरह कोई किला हाथ आवे। हम पहले लिख चुके हैं कि मावली लोगों के चित्त को तो शिवाजी पहले ही वशीभूत कर चुके थे और देश के दुर्गम मार्ग शिकार खेलने के समय ही देख चुके थे। अतएव किसी किले को प्राप्त करना शिवाजी के लिए कोई कठिन काम न था। वह अपने मन की तरंग में सब कुछ कर सकते थे।

पूना में पश्चिमी भाग में करीब 20 मील की दूरी पर ’तोरण’ नामक


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