छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji



शिवाजी की इच्छा तो प्रबल थी ही, साथ ही स्त्री की सम्मति ने अग्नि में घी की आहुति दे दी। फिर क्या था? शिवाजी के विचार और भी दृढ़ हो गये। यद्यपि दादाजी ने भी आदेशानुसार उसे समझाया था क्योंकि दादाजी शिवाजी के रक्षक थे। तब भी कभी कभी दादाजी शिवाजी को ऐसे उत्तर दे दिया करते थे जिससे वह सदैव प्रसन्न रहे। शिवाजी के हृदय में धर्मरक्षा की ज्वलन्त अग्नि धधक रही थी। दादाजी भी समझ गये कि शिवाजी के विचार अटल हैं। अतएव चुप रह जाने


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शिवाजी की इच्छा तो प्रबल थी ही, साथ ही स्त्री की सम्मति ने अग्नि में घी की आहुति दे दी। फिर क्या था? शिवाजी के विचार और भी दृढ़ हो गये। यद्यपि दादाजी ने भी आदेशानुसार उसे समझाया था क्योंकि दादाजी शिवाजी के रक्षक थे। तब भी कभी कभी दादाजी शिवाजी को ऐसे उत्तर दे दिया करते थे जिससे वह सदैव प्रसन्न रहे। शिवाजी के हृदय में धर्मरक्षा की ज्वलन्त अग्नि धधक रही थी। दादाजी भी समझ गये कि शिवाजी के विचार अटल हैं। अतएव चुप रह जाने


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