के अतिरिक्त दादाजी ने और कोई कार्यवाही नहीं की। कुछ दिनों के उपरान्त दादा कोंड़देव का स्वर्गवास हो गया।
मरने के कुछ दिन पहले दादाजी ने शिवाजी को अपने पास बुलाया और बजाय इसके कि वह शिवाजी को अपने काम से रोकते यह उपदेश दिया- बेटा! धीरता से स्वतंत्र होने की चेष्टा करना। धर्म, गो-ब्राह्यण और प्रजा की रक्षा करना। हिन्दुओं के मन्दिरों को नष्ट भ्रष्ट होने से बचाना और अपना नाम जगत् में फैलाना। वृद्व शिक्षक के इस उपदेश ने वीर
के अतिरिक्त दादाजी ने और कोई कार्यवाही नहीं की। कुछ दिनों के उपरान्त दादा कोंड़देव का स्वर्गवास हो गया।
मरने के कुछ दिन पहले दादाजी ने शिवाजी को अपने पास बुलाया और बजाय इसके कि वह शिवाजी को अपने काम से रोकते यह उपदेश दिया- बेटा! धीरता से स्वतंत्र होने की चेष्टा करना। धर्म, गो-ब्राह्यण और प्रजा की रक्षा करना। हिन्दुओं के मन्दिरों को नष्ट भ्रष्ट होने से बचाना और अपना नाम जगत् में फैलाना। वृद्व शिक्षक के इस उपदेश ने वीर