मांगा तो उसने उत्तर में लिख भेजा िकइस निर्धन इलाके की आमदनी इसके व्यय के ही लिए काफी होती है, बचने बचाने की कोई गुंजाइश नहीं है। सारी जागीर में केवल दो आदमी ऐसे थे जो शिवाजी से सहमत नहीं थे। इसलिए यह आवश्यक था कि वे या तो अपने पक्ष में हो जायें या एकदम पृथक हो जायें उन विपक्षियों में से एक का नाम फ़िरंगाजी नरसला था और दूसरे का नाम सम्भाजी मोहिते था। पहला ’चाकन’ नामक जिले का अध्यक्ष था और दूसरा शाहजी की दूसरी स्त्री शिवाजी
मांगा तो उसने उत्तर में लिख भेजा िकइस निर्धन इलाके की आमदनी इसके व्यय के ही लिए काफी होती है, बचने बचाने की कोई गुंजाइश नहीं है। सारी जागीर में केवल दो आदमी ऐसे थे जो शिवाजी से सहमत नहीं थे। इसलिए यह आवश्यक था कि वे या तो अपने पक्ष में हो जायें या एकदम पृथक हो जायें उन विपक्षियों में से एक का नाम फ़िरंगाजी नरसला था और दूसरे का नाम सम्भाजी मोहिते था। पहला ’चाकन’ नामक जिले का अध्यक्ष था और दूसरा शाहजी की दूसरी स्त्री शिवाजी