है कि आर्य जाति संसार की प्राचीनतम जाति है। इस जाति में पाई जाने वाली विद्या, इसका धर्म तथा इसकी सभ्यता ही इसके प्राचीनतम होने के प्रमाण हैं।
जिस जाति ने गाणित और ज्योतिष विद्या का गूढ़तम
विज्ञप्ति 9
अध्ययन किया वह आज अधोगति को प्राप्त हो गई है। जिस जाति की नींव सभ्यता के उच्च स्वरूप पर रखी गई हो, उसके लिए आवश्यक है कि अन्य जातियों के ग्रन्थों का अध्ययन करने की अपेक्षा वह स्वयं के ग्रन्थों का ही परिशीलन करे। यह सब
है कि आर्य जाति संसार की प्राचीनतम जाति है। इस जाति में पाई जाने वाली विद्या, इसका धर्म तथा इसकी सभ्यता ही इसके प्राचीनतम होने के प्रमाण हैं।
जिस जाति ने गाणित और ज्योतिष विद्या का गूढ़तम
विज्ञप्ति 9
अध्ययन किया वह आज अधोगति को प्राप्त हो गई है। जिस जाति की नींव सभ्यता के उच्च स्वरूप पर रखी गई हो, उसके लिए आवश्यक है कि अन्य जातियों के ग्रन्थों का अध्ययन करने की अपेक्षा वह स्वयं के ग्रन्थों का ही परिशीलन करे। यह सब