की परीक्षा करने लगे जो 100 वर्ष पूर्व से भारत की अधिपति बनी चली आती थी, जिसकी गद्दी पर आज औरंगजेब जैसा नृशंस और कपटी मनुष्य विराजमान था। यद्यपि शिवाजी राज-प्रबन्ध करने लगे थे परन्तू मन में निश्चय कर लिया कि जब तक सामना करने की पूर्ण सामग्री न हो जाये तब तक सामना न करना ही ठीक होगा और तब तक चापलूसी की बातों से ही औरंगजेब को भुलावा देते रहे।
ऊपर लिखा जा चुका है कि जब शाहजी दरबार बीजापुर में कैद किये गये थे तो शिवाजी ने
की परीक्षा करने लगे जो 100 वर्ष पूर्व से भारत की अधिपति बनी चली आती थी, जिसकी गद्दी पर आज औरंगजेब जैसा नृशंस और कपटी मनुष्य विराजमान था। यद्यपि शिवाजी राज-प्रबन्ध करने लगे थे परन्तू मन में निश्चय कर लिया कि जब तक सामना करने की पूर्ण सामग्री न हो जाये तब तक सामना न करना ही ठीक होगा और तब तक चापलूसी की बातों से ही औरंगजेब को भुलावा देते रहे।
ऊपर लिखा जा चुका है कि जब शाहजी दरबार बीजापुर में कैद किये गये थे तो शिवाजी ने