छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

शाहजहां से अपील की थी और शाहजहां ने उनको पांच हजारी का पारितोषिक दिया था। परन्तू शिवाजी ने उसे स्वीकार करने के स्थान पर कुछ प्रान्तों के विषय में अपनी देखमुखी और चैथ के अधिकार पेश किये थे। अन्त में शाहजहां ने यह प्रतिज्ञा की थी कि जब शिवाजी पांच हजारी पुरस्कार को स्वीकार करके दरबार में आ जायेंगे तो और अधिकारों पर भी विचार किया जायेगा। शिवाजी ने अब फिर इस विषय में औरंगजेब के साथ बातचीत की और बीजापुर के बादशाह आदिलशाह के कुप्रबन्ध की नींव पर ’कोंकण’ प्रान्त पर स्वत्व


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शाहजहां से अपील की थी और शाहजहां ने उनको पांच हजारी का पारितोषिक दिया था। परन्तू शिवाजी ने उसे स्वीकार करने के स्थान पर कुछ प्रान्तों के विषय में अपनी देखमुखी और चैथ के अधिकार पेश किये थे। अन्त में शाहजहां ने यह प्रतिज्ञा की थी कि जब शिवाजी पांच हजारी पुरस्कार को स्वीकार करके दरबार में आ जायेंगे तो और अधिकारों पर भी विचार किया जायेगा। शिवाजी ने अब फिर इस विषय में औरंगजेब के साथ बातचीत की और बीजापुर के बादशाह आदिलशाह के कुप्रबन्ध की नींव पर ’कोंकण’ प्रान्त पर स्वत्व


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