छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

करना अत्यन्त आवश्यक है अन्यथा सम्पूर्ण देश निकल जाने का सन्देह है। इस लड़ाई के लिए बीजापुर दरबार ने प्रबन्ध आरम्भ कर दिया। अफजल खां ने (जो बीजापुर दरबार का एक पदाधिकारी था) इस सेना की सिपहसालारी स्वाकार की और चलते समय भरे दरबार में बड़ो अंहकार से यह प्रतिज्ञा की कि मैं बहुत शीध्र इस तुच्छ द्रोही को नंगे पांव दरबार में उपस्थित करूंगा अन्यथा उसका सिर काट लाऊंगा। शिवाजी को जब यह समाचार मिले तो उन्होंने प्रतापगढ़ के दुर्ग में


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करना अत्यन्त आवश्यक है अन्यथा सम्पूर्ण देश निकल जाने का सन्देह है। इस लड़ाई के लिए बीजापुर दरबार ने प्रबन्ध आरम्भ कर दिया। अफजल खां ने (जो बीजापुर दरबार का एक पदाधिकारी था) इस सेना की सिपहसालारी स्वाकार की और चलते समय भरे दरबार में बड़ो अंहकार से यह प्रतिज्ञा की कि मैं बहुत शीध्र इस तुच्छ द्रोही को नंगे पांव दरबार में उपस्थित करूंगा अन्यथा उसका सिर काट लाऊंगा। शिवाजी को जब यह समाचार मिले तो उन्होंने प्रतापगढ़ के दुर्ग में


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