साथ न करेंगे। मुसलमान लेखक लिखते हैं कि ऐसा सन्देश शिवाजी ने ब्राह्यण द्वारा भेजा था और अफ़ज़ल खां ने उसे मान लिया और अकेले उस स्थान पर आया जहां शिवाजी ने मुलाकात करने को कहा था। जब अफ़ज़ल खां बगलगीर को बढ़ा तो शिवाजी ने जो सुसज्जित था, अपने जातीय शस्त्र (बिछुवे) से उसका पेट फाड़ डाला और तलवार से काम तमाम कर दिया। अफ़ज़ल खां के साथ जो थोडे़ से मनुष्य साथ आकर कुछ दूरी पर छिपे बैठे थे आ पहुंचे और सम्पूर्ण सेना में कोलाहल मच गया।
साथ न करेंगे। मुसलमान लेखक लिखते हैं कि ऐसा सन्देश शिवाजी ने ब्राह्यण द्वारा भेजा था और अफ़ज़ल खां ने उसे मान लिया और अकेले उस स्थान पर आया जहां शिवाजी ने मुलाकात करने को कहा था। जब अफ़ज़ल खां बगलगीर को बढ़ा तो शिवाजी ने जो सुसज्जित था, अपने जातीय शस्त्र (बिछुवे) से उसका पेट फाड़ डाला और तलवार से काम तमाम कर दिया। अफ़ज़ल खां के साथ जो थोडे़ से मनुष्य साथ आकर कुछ दूरी पर छिपे बैठे थे आ पहुंचे और सम्पूर्ण सेना में कोलाहल मच गया।