और अपने पूरोहित ब्राह्यणों को काशी तथा गया आादि स्थानों में पिण्ड देने के निमित्त भेज दिया और स्वयं पूजा भक्ति करके शस्त्र बांधा और भीतर ’सज्जो’ पहिना। उसके ऊपर साधारण सादा ’अंगरखा’ पहिना। इसका अभिप्राय यह था कि शिवाजी हर प्रकार से मरने के लिए उद्यत होकर अपने विश्राम भवन से निकला। जिस समय शिवाजी से बगलगीर होने की इच्छा से अफ़ज़ल खां आगे बढ़ा और पास जाकर शिवाजी का माथा पकड़कर जोर से दबाना आरम्भ किया और झट म्यान से तलवार निकाल शिवाजी पर चलाई,
और अपने पूरोहित ब्राह्यणों को काशी तथा गया आादि स्थानों में पिण्ड देने के निमित्त भेज दिया और स्वयं पूजा भक्ति करके शस्त्र बांधा और भीतर ’सज्जो’ पहिना। उसके ऊपर साधारण सादा ’अंगरखा’ पहिना। इसका अभिप्राय यह था कि शिवाजी हर प्रकार से मरने के लिए उद्यत होकर अपने विश्राम भवन से निकला। जिस समय शिवाजी से बगलगीर होने की इच्छा से अफ़ज़ल खां आगे बढ़ा और पास जाकर शिवाजी का माथा पकड़कर जोर से दबाना आरम्भ किया और झट म्यान से तलवार निकाल शिवाजी पर चलाई,