छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

ने शत्रु रक्त में हाथ रंगने शुरू कर दिये। सम्पूर्ण इतिहासकार इस बात से सहमत हैं कि शिवाजी इस प्रकार के कर्म से सदा अप्रसन्नता प्रकट करता था और आज्ञाएं निकाल रक्खी थी कि यथासम्भव किसी के साथ अनावश्यक युद्व न छेड़ा जाये। शिवाजी कैदियों के साथ सदैव अत्यन्त क ृपा तथा दया का बर्ताव करता था। इस अवसर पर जितने शत्रु के सैनिक कैद कर लिऐ गये उनके साथ भी शिवाजी अत्यन्त अनुग्रह और दया से पेश आता था। बहुत से लोगों ने इसी अनुग्रह के


192 of 401

ने शत्रु रक्त में हाथ रंगने शुरू कर दिये। सम्पूर्ण इतिहासकार इस बात से सहमत हैं कि शिवाजी इस प्रकार के कर्म से सदा अप्रसन्नता प्रकट करता था और आज्ञाएं निकाल रक्खी थी कि यथासम्भव किसी के साथ अनावश्यक युद्व न छेड़ा जाये। शिवाजी कैदियों के साथ सदैव अत्यन्त क ृपा तथा दया का बर्ताव करता था। इस अवसर पर जितने शत्रु के सैनिक कैद कर लिऐ गये उनके साथ भी शिवाजी अत्यन्त अनुग्रह और दया से पेश आता था। बहुत से लोगों ने इसी अनुग्रह के


192 of 401