के लिए रवाना हुए। शाही सेना अपने वीर अध्यक्षों सहित कुछ काल तक चुपचाप पूना के सापने पड़ी रही परन्तु इतनी बड़ी सेना से भयभीत न होकर शिवाजी के दिलजले अफसर शत्रु की सेना तथा उसके मण्डल को नीचा दिखाने से पीछे नहीं हटते थें ’नेताजी पालकर’ भी अहमद नगर और औरंगाबाद के सामने आ डटा। उन्होंने शत्रु के मण्डल को लूटना तथा फूंकना आरम्भ किया जिससे मुगल सेना अत्यन्त क्षुब्ध हो उठी और एक समूह उन्हें दण्ड देने के लिए रवाना हुआ जिसका सामना करता हुआ ’नेताजी’ जख्मी हुआ पर हाथ न आया।
के लिए रवाना हुए। शाही सेना अपने वीर अध्यक्षों सहित कुछ काल तक चुपचाप पूना के सापने पड़ी रही परन्तु इतनी बड़ी सेना से भयभीत न होकर शिवाजी के दिलजले अफसर शत्रु की सेना तथा उसके मण्डल को नीचा दिखाने से पीछे नहीं हटते थें ’नेताजी पालकर’ भी अहमद नगर और औरंगाबाद के सामने आ डटा। उन्होंने शत्रु के मण्डल को लूटना तथा फूंकना आरम्भ किया जिससे मुगल सेना अत्यन्त क्षुब्ध हो उठी और एक समूह उन्हें दण्ड देने के लिए रवाना हुआ जिसका सामना करता हुआ ’नेताजी’ जख्मी हुआ पर हाथ न आया।