इसी बीच शायस्ता खां पूजा में आ गया और उस मकान में रहने लगा जो कि ’दादाजी कोंडदेव’ ने बनवाया था। वीर शायस्ता खां ने यह भी विचार न किया कि शिवाजी उन महावीरों में से है जिसके सामने अनादर और गुस्ताखी से पेश आना अन्त में अच्छा फल नहीं लाया करता । यद्यपि शायस्ता खां ने बड़ी सावधानी से प्रबन्ध किया था कि शिवाजी किसी प्रकार भी नगर के भीतर घुसने न पावें परन्तु अन्त में यह बात सिद्व हो गई कि उसकी सभी तदबीरें, बुद्विमानी और विचारशीलता शिवाजी के सामने निष्फल हुई।
इसी बीच शायस्ता खां पूजा में आ गया और उस मकान में रहने लगा जो कि ’दादाजी कोंडदेव’ ने बनवाया था। वीर शायस्ता खां ने यह भी विचार न किया कि शिवाजी उन महावीरों में से है जिसके सामने अनादर और गुस्ताखी से पेश आना अन्त में अच्छा फल नहीं लाया करता । यद्यपि शायस्ता खां ने बड़ी सावधानी से प्रबन्ध किया था कि शिवाजी किसी प्रकार भी नगर के भीतर घुसने न पावें परन्तु अन्त में यह बात सिद्व हो गई कि उसकी सभी तदबीरें, बुद्विमानी और विचारशीलता शिवाजी के सामने निष्फल हुई।