25 मावलियों और अफसरों के साथ चुपचाप उस जुलूस में ( जो बाजार में चक्कर लगा रहा था) आकर शामिल हो गये। जब सब लोग सो गये तो शिवाजी और उनके साथियों ने जो ’दादाजी’ के मकान की ईंट-ईंट से परिचित थे कुल्हाड़ियां लेकर ’रसोई घर’ के ऊपर चढ़ गये जहां से उन्होंने अन्दर घुसने का मार्ग बनाया परन्तु कुछ खटका होने से शायस्ता खां की स्त्रियां जग गई और कोलाहल मच गया। शायस्ता खां भी जाग पड़ा और एक खिड़की के रास्ते निकल कर भाग जाने की कोशिश में
25 मावलियों और अफसरों के साथ चुपचाप उस जुलूस में ( जो बाजार में चक्कर लगा रहा था) आकर शामिल हो गये। जब सब लोग सो गये तो शिवाजी और उनके साथियों ने जो ’दादाजी’ के मकान की ईंट-ईंट से परिचित थे कुल्हाड़ियां लेकर ’रसोई घर’ के ऊपर चढ़ गये जहां से उन्होंने अन्दर घुसने का मार्ग बनाया परन्तु कुछ खटका होने से शायस्ता खां की स्त्रियां जग गई और कोलाहल मच गया। शायस्ता खां भी जाग पड़ा और एक खिड़की के रास्ते निकल कर भाग जाने की कोशिश में