था कि शिवाजी ने उसके हाथ पर वार किया। फलस्वरूप उसकी एक अंगुली कट गई। शायस्ता खां तो किसी प्रकार बचकर भाग निकला परन्तु उसका लड़का ’अब्दुल फतेह खां’ और बहुत से सिपाही मारे गये। जब वे तीन या चार कोस की दूरी पर पहुंचे तब उन्होंने मशालें जलाई मानो वे शाही सेना को, जो सामने खड़ी थी, दिखला रहे हैं कि हम कैसी प्रसन्नता से बिना किसी चिन्ता-भय के मशालों की रोशनी में आनन्द लेते हुए अपना काम करके वापस जा रहे हैं।
शिवाजी का यह काम
था कि शिवाजी ने उसके हाथ पर वार किया। फलस्वरूप उसकी एक अंगुली कट गई। शायस्ता खां तो किसी प्रकार बचकर भाग निकला परन्तु उसका लड़का ’अब्दुल फतेह खां’ और बहुत से सिपाही मारे गये। जब वे तीन या चार कोस की दूरी पर पहुंचे तब उन्होंने मशालें जलाई मानो वे शाही सेना को, जो सामने खड़ी थी, दिखला रहे हैं कि हम कैसी प्रसन्नता से बिना किसी चिन्ता-भय के मशालों की रोशनी में आनन्द लेते हुए अपना काम करके वापस जा रहे हैं।
शिवाजी का यह काम