उनके जीवन के बड़े कारनामों में मुख्य गिना जाता है, और क्यों न हो, जब कि सारी शाही सेना सामना करने के लिए सुसज्जित हो और शिवाजी 25 मनुष्यों के साथ शायस्ता खां के महल में जा घुसे और मार काट करके
72 छत्रपति शिवाजी
बिना किसी प्रकार की हाानि के मशालों की रोशनी में गरजते हुए अपने किले में वापस आये। यह एक ऐसी करतूत है जो फुरती से भरे हूए वीर के हिस्से में पड़ी है। प्रातःकाल होते ही मुगल सेना किले की ओर बढ़ी और जब बिल्कुल समीप
उनके जीवन के बड़े कारनामों में मुख्य गिना जाता है, और क्यों न हो, जब कि सारी शाही सेना सामना करने के लिए सुसज्जित हो और शिवाजी 25 मनुष्यों के साथ शायस्ता खां के महल में जा घुसे और मार काट करके
72 छत्रपति शिवाजी
बिना किसी प्रकार की हाानि के मशालों की रोशनी में गरजते हुए अपने किले में वापस आये। यह एक ऐसी करतूत है जो फुरती से भरे हूए वीर के हिस्से में पड़ी है। प्रातःकाल होते ही मुगल सेना किले की ओर बढ़ी और जब बिल्कुल समीप