पहुंच गई (जहां से कि तोपों के गोलों से भाग कर बचना सम्भव न था) तो उसने तोपें चलाना आरम्भ कर दीं। मरहठा सरदार,जो कि पहाड़ियों में छिपे हुए थे मुगल सेना पर टूट पड़े। अब मुगल सेना के पास भागने के सिवा कोई चारा न रहा। अब मुगल सेना के पास भागने के सिवा कोई चारा न रहा। आगे आगे मुगल सेना और पीछे पीछे मरहठा सरदारों की मार से मुगल सेना के बहुत से सिपाही मारे गये।
जब शायस्ता खां को इस पराजय का समाचार मिला तो उसका दिल टूट गया और
पहुंच गई (जहां से कि तोपों के गोलों से भाग कर बचना सम्भव न था) तो उसने तोपें चलाना आरम्भ कर दीं। मरहठा सरदार,जो कि पहाड़ियों में छिपे हुए थे मुगल सेना पर टूट पड़े। अब मुगल सेना के पास भागने के सिवा कोई चारा न रहा। अब मुगल सेना के पास भागने के सिवा कोई चारा न रहा। आगे आगे मुगल सेना और पीछे पीछे मरहठा सरदारों की मार से मुगल सेना के बहुत से सिपाही मारे गये।
जब शायस्ता खां को इस पराजय का समाचार मिला तो उसका दिल टूट गया और