लगा सके थे कि मान्यवर महोदय बिजली के समान कड़कते हुए अपने स्थान पर आ विराजे और अपनी सेना को कई भागों में विभक्त कर शत्रुओं की भूमि का धावा कर दिया। यहां तक कि कई एक धनाढय व्यापारियों तथा नगरों को लूट कर अपने रायगढ़ किले में आ विराजे।
शिवाजी की इस कार्य-शैली के विषय में इतिहास लिखने वालों की कुछ भी सम्मति क्यों न हो परन्तु इसमें सन्देह नहीं कि इतनी कठिनता में भी जिस शीघ्रता और चालाकी से शिवाजी ने युद्व किया वह अपूर्व बुद्विमत्ता
लगा सके थे कि मान्यवर महोदय बिजली के समान कड़कते हुए अपने स्थान पर आ विराजे और अपनी सेना को कई भागों में विभक्त कर शत्रुओं की भूमि का धावा कर दिया। यहां तक कि कई एक धनाढय व्यापारियों तथा नगरों को लूट कर अपने रायगढ़ किले में आ विराजे।
शिवाजी की इस कार्य-शैली के विषय में इतिहास लिखने वालों की कुछ भी सम्मति क्यों न हो परन्तु इसमें सन्देह नहीं कि इतनी कठिनता में भी जिस शीघ्रता और चालाकी से शिवाजी ने युद्व किया वह अपूर्व बुद्विमत्ता