और वीरता की साक्षी देता है। इतिहास में इस प्रकार की होशियारी के दृष्टान्त बहुत कम देखे जाते हैं जिनके कारण एसे रात दिन नींद न आती थी। अन्त उसने (औरंगजेब) राजा जयसिंह राजपूत और ’दिलेरखां’ पठान को एक बड़ी फौज के साथ शिवाजी को आधीन करने के लिए भेजा। शिवाजी जब सामुद्रिक कार्यो से वापस आये तो देखते हैं कि अब मुकाबले की ठन गई औरंगजेब ने भी अपने बल की परीक्षा का पूरा इरादा कर लिया है। सम्पूर्ण मित्रों व अफसरों को रायगढ़ के किले
और वीरता की साक्षी देता है। इतिहास में इस प्रकार की होशियारी के दृष्टान्त बहुत कम देखे जाते हैं जिनके कारण एसे रात दिन नींद न आती थी। अन्त उसने (औरंगजेब) राजा जयसिंह राजपूत और ’दिलेरखां’ पठान को एक बड़ी फौज के साथ शिवाजी को आधीन करने के लिए भेजा। शिवाजी जब सामुद्रिक कार्यो से वापस आये तो देखते हैं कि अब मुकाबले की ठन गई औरंगजेब ने भी अपने बल की परीक्षा का पूरा इरादा कर लिया है। सम्पूर्ण मित्रों व अफसरों को रायगढ़ के किले