में एकत्रित करके विचार करने लगे। एक दिन शिवाजी को सन्देह हो गया कि श्रीमती भवाजीदेवी (जिसकी वह पूजा करते थे) स्वप्न में यह बतला रही है कि ऐ शिवाजी! तेरे लिए इस हिन्दू सेनापति के सम्मुख विजय प्राप्त होना कठिन है। तू निःसन्देह आज तक मुसलमानों के मुकाबले में विजय प्राप्त करता रहा परन्तु आज तो तेरा ही भाई एक राजपूत तेरे मुकाबले में आ डटा है। शिवाजी! तुमको क्या मालूम था कि मक्कार औरंगजेब ने उसको इसी विचार से भेजा है कि या तो
में एकत्रित करके विचार करने लगे। एक दिन शिवाजी को सन्देह हो गया कि श्रीमती भवाजीदेवी (जिसकी वह पूजा करते थे) स्वप्न में यह बतला रही है कि ऐ शिवाजी! तेरे लिए इस हिन्दू सेनापति के सम्मुख विजय प्राप्त होना कठिन है। तू निःसन्देह आज तक मुसलमानों के मुकाबले में विजय प्राप्त करता रहा परन्तु आज तो तेरा ही भाई एक राजपूत तेरे मुकाबले में आ डटा है। शिवाजी! तुमको क्या मालूम था कि मक्कार औरंगजेब ने उसको इसी विचार से भेजा है कि या तो