छत्रपति शिवाजी 77
वह स्वयं रण में मरेगा अथवा मेरा नाश करेगा। सीधा परन्तु वीर राजपूत (जयसिंह) अपनी वीरता का प्रत्यक्ष सबूत दिखाने के लिए हिन्दुओं को दबाने और उठते हुए राज्य का गला दबाने आया है। यद्यपि इस पिछले विचार से वह जाति का शत्रु और घातक है परन्तु इसके मारे जाने पर भी औरंगजेब की विजय है। इन निर्बल कर देने वाले विचारों ने वीर मरहठा को, जिसकी नसों में राजपूती रक्त किसी कदर बदल चुका था, चिन्ता में डाल दिया। उसकी
छत्रपति शिवाजी 77
वह स्वयं रण में मरेगा अथवा मेरा नाश करेगा। सीधा परन्तु वीर राजपूत (जयसिंह) अपनी वीरता का प्रत्यक्ष सबूत दिखाने के लिए हिन्दुओं को दबाने और उठते हुए राज्य का गला दबाने आया है। यद्यपि इस पिछले विचार से वह जाति का शत्रु और घातक है परन्तु इसके मारे जाने पर भी औरंगजेब की विजय है। इन निर्बल कर देने वाले विचारों ने वीर मरहठा को, जिसकी नसों में राजपूती रक्त किसी कदर बदल चुका था, चिन्ता में डाल दिया। उसकी