छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

को लेकर पुकारता हुआ और उत्साह बढ़ाता हुआ आगे बढ़ा। वीर मरहठे यह अच्छी तरह जानते थे कि यदि ’पूर्णधर’ किला हाथ से जाता रहा तो दक्षिण भारत में हिन्दुओं का नाम निशान तक न रहने पायेगा। इसी लिये अपने प्राणों को हथेली पर लेकर वे प्रत्यक्ष काल बन गये और युद्व में कूद पड़े। थोडे़ समय में लाशों के ढेर लग गये और वे क्षण क्षण में दिलेर खां के समीप पहुंचने लगे। दिलेर खां ने सोचा कि जब तक वीर शिरोमणि जीता रहेगा तब तक उसको आधीन करना या


248 of 401

को लेकर पुकारता हुआ और उत्साह बढ़ाता हुआ आगे बढ़ा। वीर मरहठे यह अच्छी तरह जानते थे कि यदि ’पूर्णधर’ किला हाथ से जाता रहा तो दक्षिण भारत में हिन्दुओं का नाम निशान तक न रहने पायेगा। इसी लिये अपने प्राणों को हथेली पर लेकर वे प्रत्यक्ष काल बन गये और युद्व में कूद पड़े। थोडे़ समय में लाशों के ढेर लग गये और वे क्षण क्षण में दिलेर खां के समीप पहुंचने लगे। दिलेर खां ने सोचा कि जब तक वीर शिरोमणि जीता रहेगा तब तक उसको आधीन करना या


248 of 401