80 छत्रपति शिवाजी
मिथ्या विश्वासों का यह फल था कि एक वीर से वीर और जान से खेल जाने वाली एवम् आत्मा को नित्य मानने वाली भारत सन्तान इस्लामी झण्डे का मुकाबला न कर सकी और थोडे़ ही समय में दासता की जंजीर पहिन अपने शुभ गौरव, विद्या बुद्वि एवं मान सत्कार को तिलाज्जलि दे बैठी। इन्हीं मिथ्या विश्वासों ने आर्यावर्त को कई बार पहले भी धोखा देकर नष्ट किया। इसी मिथ्या विश्वास ने इस समय शिवाजी की बुद्वि पर पत्थर डाल कर उनके उत्साह
80 छत्रपति शिवाजी
मिथ्या विश्वासों का यह फल था कि एक वीर से वीर और जान से खेल जाने वाली एवम् आत्मा को नित्य मानने वाली भारत सन्तान इस्लामी झण्डे का मुकाबला न कर सकी और थोडे़ ही समय में दासता की जंजीर पहिन अपने शुभ गौरव, विद्या बुद्वि एवं मान सत्कार को तिलाज्जलि दे बैठी। इन्हीं मिथ्या विश्वासों ने आर्यावर्त को कई बार पहले भी धोखा देकर नष्ट किया। इसी मिथ्या विश्वास ने इस समय शिवाजी की बुद्वि पर पत्थर डाल कर उनके उत्साह