को धर दबाया और उनको ऐसी बातों पर विवश किया जिसने उनके गौरव और पुरूषार्थशील जीवन पर एक अमिट कलंक का टीका लगा दिया।
ऊपर लिखा जा चुका है कि शिवाजी ने राजा जयसिंह से सन्धि की शर्ते तय करने के लिए लिखा पढ़ी शुरू की थी। राजा जयसिंह ने शिवाजी के पास लिख भेजा था कि यदि शिवाजी को राजपूत के बेटे की बात पर विश्वास हो तो निर्भय होकर हमारे परस चला आवे। मैं उनको बादशाह से क्षमा करा दूंगा और इस बात की कोशिश करूंगा कि उन्हें शाही दरबार
को धर दबाया और उनको ऐसी बातों पर विवश किया जिसने उनके गौरव और पुरूषार्थशील जीवन पर एक अमिट कलंक का टीका लगा दिया।
ऊपर लिखा जा चुका है कि शिवाजी ने राजा जयसिंह से सन्धि की शर्ते तय करने के लिए लिखा पढ़ी शुरू की थी। राजा जयसिंह ने शिवाजी के पास लिख भेजा था कि यदि शिवाजी को राजपूत के बेटे की बात पर विश्वास हो तो निर्भय होकर हमारे परस चला आवे। मैं उनको बादशाह से क्षमा करा दूंगा और इस बात की कोशिश करूंगा कि उन्हें शाही दरबार