दिल्ली दरबार और शिवाजी
राजा जयसिंह ने शिवाजी के साथ बड़े आदर सत्कार की प्रतिज्ञाएं की थी जिसके कारण शिवाजी अपने मन में यह विचार लेकर दिल्ली को चले थे कि औरंगजेब से दक्षिणी राज्य का पट्टा प्राप्त करेंगे परन्तु जब दिल्ली के समीप आये तो अनका दिमाग घूम गया। यहां और ही रंग के खेल दृष्टिगोचर होने लगे। शानदार और सुसज्जित अगवानी के स्थान पर देखते क्या हैं कि केवल जयसिंह का पुत्र रामसिंह तथा एक और साधारण सा शाही पदाधिकारी आ
दिल्ली दरबार और शिवाजी
राजा जयसिंह ने शिवाजी के साथ बड़े आदर सत्कार की प्रतिज्ञाएं की थी जिसके कारण शिवाजी अपने मन में यह विचार लेकर दिल्ली को चले थे कि औरंगजेब से दक्षिणी राज्य का पट्टा प्राप्त करेंगे परन्तु जब दिल्ली के समीप आये तो अनका दिमाग घूम गया। यहां और ही रंग के खेल दृष्टिगोचर होने लगे। शानदार और सुसज्जित अगवानी के स्थान पर देखते क्या हैं कि केवल जयसिंह का पुत्र रामसिंह तथा एक और साधारण सा शाही पदाधिकारी आ