रहा है। यह देख कर शिवाजी मन में बहुत लज्जित हुए और सोचने लगे बड़ी भूल हुई और मैंने बड़ी भारी हार खाई। उन्हें सन्देह हो गया कहीं ऐसा न हो कि इसी भूल में प्राण भी चला जाये, अतएव मुझे सचेत हो जाना चाहिए। इस प्रकार ज्यों त्यों करके दिल्ली पहुंचे। उधर औरंगजेब ने विचारा कि बस अब क्या है अब तो शिवाजी मेरे काबू में आ गया। यही अवसर है कि दिल्ली का राजकीय गौरव इन्हें दिखाया जाय। उसने सोचा कि शिवाजी ने अपनी सारी आयु जंगलों में काटी
रहा है। यह देख कर शिवाजी मन में बहुत लज्जित हुए और सोचने लगे बड़ी भूल हुई और मैंने बड़ी भारी हार खाई। उन्हें सन्देह हो गया कहीं ऐसा न हो कि इसी भूल में प्राण भी चला जाये, अतएव मुझे सचेत हो जाना चाहिए। इस प्रकार ज्यों त्यों करके दिल्ली पहुंचे। उधर औरंगजेब ने विचारा कि बस अब क्या है अब तो शिवाजी मेरे काबू में आ गया। यही अवसर है कि दिल्ली का राजकीय गौरव इन्हें दिखाया जाय। उसने सोचा कि शिवाजी ने अपनी सारी आयु जंगलों में काटी