सिर झुका चुके हैं। राणा प्रतापसिंह के पदाधिकारी भी
छत्रपति शिवाजी 83
इस राज्य का लोहा मान चुके हैं। कन्नौज, दिल्ली, पाटलीपुत्र, मारवाड़ और मेवाड आदि सम्पूर्ण बड़े बडे़ राज्यों का गौरव आदर,सत्कार और धन मुग़ल सम्राट् के चरणों में पहुंच चुका है। जौरंगजेब चाहता था कि शिवाजी सब कुछ अपनी आंखों से देखे और मुग़लिया राज्य के गौरव तथा अपनी हीनावस्था का खूब अनुभव करे ताकि फिर उसे मेरा सामना करने का साहस न हो।
औरंगजेब ऊपरी हृदय
सिर झुका चुके हैं। राणा प्रतापसिंह के पदाधिकारी भी
छत्रपति शिवाजी 83
इस राज्य का लोहा मान चुके हैं। कन्नौज, दिल्ली, पाटलीपुत्र, मारवाड़ और मेवाड आदि सम्पूर्ण बड़े बडे़ राज्यों का गौरव आदर,सत्कार और धन मुग़ल सम्राट् के चरणों में पहुंच चुका है। जौरंगजेब चाहता था कि शिवाजी सब कुछ अपनी आंखों से देखे और मुग़लिया राज्य के गौरव तथा अपनी हीनावस्था का खूब अनुभव करे ताकि फिर उसे मेरा सामना करने का साहस न हो।
औरंगजेब ऊपरी हृदय