एक शिवाजी का ही अधिक खटका था से वह भी आज उसकी सेवा के लिए आ पहंुचा है। दरबारियों के लिए तीन दर्जे सुसज्जित किये गये थे जिनमें से पहले दर्जे में सुनहरी फर्श और दूसरे दर्जे में रूपहली और
84 छत्रपति शिवाजी
तीसरी दर्जे में संगमर्मर का फर्श था। जब शिवाजी दरबार में आये तो उसको सुनहरी फर्श के दर्जे में उन लोगों की श्रेणी में जो पांच हजारी पुरस्कार पाया करते थे, बैठने की आज्ञा दी गई। शिवाजी इस अनादर और अपमान को न सहन कर सके।
एक शिवाजी का ही अधिक खटका था से वह भी आज उसकी सेवा के लिए आ पहंुचा है। दरबारियों के लिए तीन दर्जे सुसज्जित किये गये थे जिनमें से पहले दर्जे में सुनहरी फर्श और दूसरे दर्जे में रूपहली और
84 छत्रपति शिवाजी
तीसरी दर्जे में संगमर्मर का फर्श था। जब शिवाजी दरबार में आये तो उसको सुनहरी फर्श के दर्जे में उन लोगों की श्रेणी में जो पांच हजारी पुरस्कार पाया करते थे, बैठने की आज्ञा दी गई। शिवाजी इस अनादर और अपमान को न सहन कर सके।