ओर मुसलमान पदाधिकारी अपने अपने स्थान पर बैठे हैं, सेना के लाखों मनुष्य मात्र नेत्र संचालन करने पर ही अपनी चमकीली औी तीक्ष्ण तलवारों को खनखनाने के लिए उद्यत हैं और यह महात्मा अकेला बिना किसी प्रकार के मित्र और सहायक के केवल चन्द साथियों के भरोसे पर इस प्रकार अण्ड बण्ड बक रहा है।
परन्तु सल्तनत मुग़लिया के भरे दरबार में इस प्रकार का साहस दिखाने का यह पहला मौका न था। अभी अधिक समय नहीं बीता था और कदाचित् उस घटना को अपनी आंखों
ओर मुसलमान पदाधिकारी अपने अपने स्थान पर बैठे हैं, सेना के लाखों मनुष्य मात्र नेत्र संचालन करने पर ही अपनी चमकीली औी तीक्ष्ण तलवारों को खनखनाने के लिए उद्यत हैं और यह महात्मा अकेला बिना किसी प्रकार के मित्र और सहायक के केवल चन्द साथियों के भरोसे पर इस प्रकार अण्ड बण्ड बक रहा है।
परन्तु सल्तनत मुग़लिया के भरे दरबार में इस प्रकार का साहस दिखाने का यह पहला मौका न था। अभी अधिक समय नहीं बीता था और कदाचित् उस घटना को अपनी आंखों